"गरीब की जेब से 19,000 करोड़ की चुपके वाली लूट! बैंक अब गरीबी पर टैक्स वसूल रहे हैं - राघव चड्ढा ने सदन में उठाई आवाज़!"
राघव चड्ढा बोले:
माननीय अध्यक्ष महोदय,
सदन के सभी सम्मानित सदस्यगण, और मेरे देश के करोड़ों मेहनतकश भाई-बहनों!
आज मैं आपके सामने एक ऐसी सच्चाई रख रहा हूँ जो हर उस गरीब के दिल को चीर देगी, जिसकी जेब से चुपचाप पैसा काटा जा रहा है।
पिछले तीन वित्तीय वर्षों में बैंकों ने सिर्फ़ 'न्यूनतम बैलेंस न रखने' के नाम पर "19,000 करोड़ रुपये" वसूल लिए हैं!
हाँ, आपने सही सुना --> "19,000 करोड़!
सरकारी बैंकों ने 8,000 करोड़, और निजी बैंकों ने 11,000 करोड़ की यह लूट मचाई है।
ये पैसा अमीरों का नहीं, बड़े कारोबारियों का नहीं - बल्कि उन गरीबों का है जो:
- दिहाड़ी मजदूर हैं, जिनकी रोज की कमाई 300-400 रुपये भी नहीं बच पाती,
- छोटे किसान हैं, जो फसल बर्बाद होने पर भी बैंक में थोड़ा-सा पैसा रखते हैं सुरक्षा के लिए,
- बुजुर्ग पेंशनभोगी हैं, जो दवा के लिए निकालते हैं तो चार्ज कट जाता है,
- गृहिणियाँ हैं, जो घर चलाने के लिए हर पैसा गिन-गिनकर रखती हैं।
उनका जुर्म? बस इतना कि उनके खाते में 'न्यूनतम बैलेंस' पूरा नहीं हुआ!
100 रुपये, 200 रुपये, 500 रुपये का फर्क - और बैंक 100 से 600 रुपये तक का पेनल्टी चार्ज काट लेते हैं।
ATM का एक्स्ट्रा यूज़? चार्ज!
स्टेटमेंट चाहिए? चार्ज!
खाता इनएक्टिव? चार्ज!
ये सब छोटे-छोटे नामों में छिपी हुई लूट है, जो हर महीने गरीब की मेहनत की कमाई को चूसती जाती है।
हम 'फाइनेंशियल इन्क्लूजन' की बात करते हैं, लेकिन क्या यह इन्क्लूजन है?
नहीं! यह तो गरीबी पर टैक्स है!
गरीब बैंक में पैसा इसलिए रखता है ताकि सुरक्षित रहे, चोरी न हो - लेकिन बैंक उसी सुरक्षा के नाम पर उसकी जेब काट रहे हैं।
मैं पूरे सदन से, सरकार से, और RBI से माँग करता हूँ:
"सारे मिनिमम बैलेंस पेनल्टी चार्जेस तुरंत जीरो कर दीजिए!"
छोटे खातों से कोई भी हिडन चार्ज, फाइन प्रिंट वाली लूट बंद हो!
बैंक अब आम आदमी का खून न चूसें - बल्कि उसकी रक्षा करें, उसकी मदद करें।
यह सिर्फ़ एक मुद्दा नहीं है, भाईयो-बहनों...
यह आम आदमी की चीख है, न्याय की पुकार है!
अगर हम गरीब की जेब बचाएँगे, तभी सच्चा 'सबका साथ, सबका विकास' होगा।
जय हिंद! 🇮🇳