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ॐ नमो नारायणाय 🙏
भगवान विष्णु के पहले अवतार, मत्स्य अवतार की कथा अत्यंत प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद है। यह अवतार तब हुआ जब भगवान ने मछली का रूप धारण कर पृथ्वी को जल प्रलय से बचाया।
इस कथा की शुरुआत सत्ययुग में होती है, जब राजा सत्यव्रत को एक छोटी मछली मिलती है, जो उनसे सहायता मांगती है।
राजा की करुणा और मछली के रूप में भगवान विष्णु की सहायता के कारण, यह मछली विशाल आकार धारण कर लेती है और आने वाली प्रलय से राजा और सभी जीवों की रक्षा करती है।
भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की पूजा से हमें जीवन में आने वाले संकटों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
इस दिन भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की पूजा करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है, मत्स्य जयंती के दिन मत्स्य पुराण को सुनना और पढ़ना भी श्रेष्ठ माना गया है।
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च को देर रात 2 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 21 मार्च को रात 11 बजकर 56 मिनट पर होगा। ऐसे में मत्स्य जयंती शनिवार 21 मार्च को मनाई जाएगी।

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