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गणगौर पर्व भारतीय संस्कृति में प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक है। यह त्योहार विशेषकर महिलाओं द्वारा मनाया जाता है, जो अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली और सामंजस्य की प्रार्थना करती हैं।

इस दिन, ईसर-गौर की प्रतिमाएं स्थापित कर विधिवत पूजा की जाती है, जिसमें सुहाग सामग्री का विशेष महत्व होता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता गवरजा (मां पार्वती) होली के दूसरे दिन अपने पीहर आती हैं और आठ दिनों के बाद भगवान शिव (इसर जी) उन्हें वापस लेने के लिए आते हैं, फिर चैत्र शुक्ल तृतीया को उनकी विदाई होती है।

गणगौर के गीत और शोभायात्राएं इस पर्व को और भी रंगीन बना देती हैं। राजस्थान में यह त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जहां महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजकर सामूहिक रूप से गीत-नृत्य करती हैं।

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