सुप्रीम कोर्ट ने एक तलाक मामले की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्नी का घर के काम जैसे खाना न बनाना क्रूरता नहीं माना जा सकता. अदालत ने साफ कहा कि शादी का मतलब किसी नौकरानी से नहीं, बल्कि जीवनसाथी से होता है. सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, 'आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे, आप एक जीवनसाथी से शादी कर रहे हैं.' कोर्ट ने यह भी कहा कि समय बदल चुका है और अब घर के कामों में पति को भी बराबर जिम्मेदारी निभानी चाहिए. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, 'आज के समय में खाना बनाना, कपड़े धोना जैसे कामों में पति को भी सहयोग करना होगा.'

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