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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर छाए संकट ने मार्च 2020 की याद दिला दी है. सोशल मीडिया हो या ऑफिस, घर हो या बाजार, हर जगह यही चर्चा है. आज से ठीक 6 साल पहले यही महीना था. हर रोज जनता को आश्वस्त किया जा रहा था कि सब कुछ नियंत्रण में है. ठीक आज की तरह सर्वदलीय बैठकें हो रही थीं, बार-बार जनता को आश्वस्त किया जा रहा था कि सब कुछ सरकार के नियंत्रण में है. काला बाजारी करने वालों पर सख्त एक्शन की धमकी दी जा रही थी, पर जब कोविड अपने चरम पर पहुंचा तो जैसे सब कुछ ठप पड़ गया.

अस्पतालों में आक्सीजन सिलिंडर नहीं था. पर ताकतवर और प्रभावशाली लोगों के घरों में सिलिंडर हो या रैमडेसियर जैसी मेडिसिन के स्टॉक भरे पड़े थे. जिसको जरूरत थी उसे न सिलिंडर मिल रहा था और न ही जीवनरक्षक दवाएं मिल रहीं थीं. जाहिर है कि ईरान संकट अगर कुछ दिन और चला तो भयंकर मंदी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके साथ आंशिक लॉकडाउन भी हो सकता है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कह रहे हैं कि कोविड की तरह इस बार भी हर समस्या से पार पा लेंगे.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि सरकार एक फिर इस समस्या से भी पार पा लेगी. लेकिन कोविड से पार पाने में देश, समाज और लोगों ने बहुत कुछ खोया था. किसी भी तरह का आश्वासन लोगों के डर को कम नहीं कर पा रहा है. अभी तो फिलहाल छिटपुट रूप से देश भर में गैस और तेल की मारा-मारी की खबरें सामने आ रही हैं. जाहिर है कि अगर यह भेड़ चाल पूरे देश को अपने चपेट में ले लेगा. हालांकि जनता में इस बार जनता 2020 वाला भय नहीं. पर भीड़ के पैनिक को रोकना बहुत जरूरी है.

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