क्या कोई भी ईमान वाला इस बात को पसंद करेगा की उसकी बेटी अपने गैर मुस्लिम बायफ्रेंड से पहले सात फेरे ले कर शादी करें फिर उसी से निकाह भी कर लें?
या कोई ईमान वाला ये पसंद करेगा की उसका बेटा किसी गैर मुस्लिम लड़की से पहले निकाह करें फिर उसके संग सात फेरे ले पूजा करें?

यकीनन नहीं करेगा

लेकिन जो माहौल पैदा किया जा रहा उसे देखते हुए मुमकिन है कि अब ये चलन शुरू हो जाए,
अगर आपके बच्चे किसी ऐसे सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के दीवाने हैं तो मोहतात हो जाएं,
क्यों की ये जो ट्रेंड का दौर है ना ये जो ना करा लें,
अब ऐसी शादियां विडियो क्रिएटर जानबूझकर करेंगे
ताकि आडियंस उन्हें देखें
क्योंकि ये हिंदू मुस्लिम का मामला होगा,

इस चक्कर में ना जाने कितने ईमान से फिर जाएंगे या जाएंगी,

ऐसी शादियां मुबारक की मुस्तहिक नहीं बल्कि अफसोस का मकाम है
की हम किधर जा रहे..

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