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कानपुर में सामने आए किडनी रैकेट मामले ने एक बार फिर समाज को झकझोर कर रख दिया है। बिहार के रहने वाले MBA छात्र आयुष कुमार की कहानी न सिर्फ दर्दनाक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आर्थिक तंगी इंसान को किस हद तक मजबूर कर सकती है।

आईसीयू में भर्ती आयुष अपनी हालत को लेकर बेहद भावुक है। पुलिस के अनुसार, जब भी उसके परिवार को इस बारे में बताने की बात होती है, वह रो पड़ता है और हाथ जोड़कर यही गुहार लगाता है कि उसकी मां को इस बारे में न बताया जाए। उसने घर से नौकरी के बहाने निकलकर यह कदम उठाया था।

सबसे ज्यादा भावुक पल तब आया जब उसकी महिला मित्र उससे मिलने अस्पताल पहुंची। उसे देखते ही आयुष टूट गया और बार-बार अपनी गलती स्वीकार करते हुए पछतावा जताने लगा। उसके हाथ पर बना “I Love You Mom” का टैटू इस बात की गवाही देता है कि उसने यह कदम परिवार के लिए ही उठाया, लेकिन रास्ता गलत चुन लिया।

आयुष ने पुलिस को बताया कि पिता के निधन के बाद घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई थी। फीस भरने का दबाव, जिम्मेदारियां और पैसों की कमी ने उसे इस कदर परेशान कर दिया कि उसने किडनी बेचने का फैसला कर लिया। 6 लाख रुपये में सौदा तय हुआ, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे पूरी रकम भी नहीं मिली।

जांच में यह भी सामने आया है कि यह कोई छोटा मामला नहीं, बल्कि डॉक्टरों और दलालों का एक बड़ा नेटवर्क है, जो अलग-अलग शहरों में फैला हुआ है। पुलिस अब इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है और कई जगहों पर टीमें छापेमारी में जुटी हैं।

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