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यह कथा प्रभु के बाल्यकाल की है। ब्रज में एक अत्यंत वृद्ध स्त्री रहती थी जो वन से फल लाकर बेचा करती थी। वह निर्धन थी, लेकिन उसका मन श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम से भरा था।

लीला का वर्णन
एक दिन वह टोकरी में फल लेकर नंद भवन के द्वार पर आई। बाल कृष्ण ने जब सुना कि कोई फल बेचने आया है, तो वे भी फल खाने के लिए मचल उठे। प्रभु ने देखा कि बड़े लोग अनाज के बदले फल ले रहे हैं। वे छोटे-छोटे हाथों में मुट्ठी भर अनाज लेकर दौड़ते हुए बाहर आए।

दौड़ते समय उनके नन्हे हाथों से अधिकांश अनाज जमीन पर गिर गया और जब वे बुढ़िया के पास पहुँचे, तो उनकी हथेली में केवल दो-चार दाने ही शेष बचे थे।

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