हर्षवर्धन सिंह ज़ाला की यह कहानी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मात्र 14 वर्ष की आयु में, जहाँ बच्चे अपनी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त होते हैं, गुजरात के इस होनहार छात्र ने वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट (2017) में राज्य सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ ₹5 करोड़ का ऐतिहासिक समझौता (MoU) साइन किया। हर्षवर्धन ने एक ऐसा एंटी-लैंडमाइन ड्रोन विकसित किया है जो युद्ध के मैदान में छिपी बारूदी सुरंगों (landmines) का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित रूप से नष्ट कर सकता है। यह ड्रोन 21-मेगापिक्सल कैमरे, इंफ्रारेड और थर्मल सेंसर से लैस है, जो जमीन से 2 फीट ऊपर उड़ते हुए 8 वर्ग मीटर के क्षेत्र में लैंडमाइंस खोज सकता है और उन्हें विस्फोट करने के लिए 50 ग्राम का डेटोनेटर भी साथ ले जाता है। अपने विजन को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने अपनी खुद की कंपनी 'एयरोबोटिक्स 7 (Aerobotics 7)' शुरू की है, जिसका मुख्य उद्देश्य हमारे जांबाज सैनिकों की जान बचाना है।