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सुंदरता देखने वाले की आँखों में होती है। परंतु इस सुंदरता पर कौन न रीझ जाए।

माँ का ममत्व, बेटे का भोलापन।

बाल कृष्ण के हाथ में एक छोटा सोने का प्याला है। वे बाल-सुलभ उत्सुकता से ताजे दूध की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

माँ यशोदा का मुख पीछे की ओर मुड़ा हुआ है। उनकी आंखों में अपने पुत्र के लिए असीम प्रेम और ममता झलक रही है।

पृष्ठभूमि में स्वस्थ और सौम्य सफेद कामधेनु खड़ी है, जो हिंदू संस्कृति में पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है।

माँ का काम करते हुए भी बच्चे पर ध्यान देना, भारतीय ग्रामीण जीवन और ममत्व का एक आदर्श दृश्य प्रस्तुत करता है।

माता यशोदा, बाल कृष्ण और कामधेनु का राजा रवि वर्मा का बनाया यह चित्र 167 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ। इसे पुणे के साइरस पूनावाला ने ख़रीदा जिनकी कंपनी कोविड महामारी के दौरान वैक्सीन बना कर चर्चा में आई थी।

इसने एम एफ हुसैन की पेंटिंग का रिकॉर्ड तोड़ा जो 118 करोड़ रुपए में नीलाम हुई थी।

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