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जो खुद टूटकर भी अपने घर को संभाल लेती हैं...
जब हालात ने पिता का साया छीन लिया,
तब इस बेटी ने हिम्मत का दामन थाम लिया…
ना कोई शिकायत, ना कोई हार,
अपने सपनों को पीछे छोड़, उठाया पूरे घर का भार।
हर रोज़ पसीने से लिखती है अपनी कहानी,
अपने भाई-बहनों के लिए बन गई वो एक मिसाल सुहानी।
ये सिर्फ एक बेटी नहीं…
ये एक परिवार की ताकत है, एक उम्मीद की रोशनी है।
सलाम है ऐसी बेटियों को,
जो खुद टूटकर भी अपने घर को संभाल लेती हैं।"

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