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राजस्थान के वीर सपूत सौरभ कटारा की कहानी सुनकर हर देशवासी की आंखें नम हो जाती हैं। एक ओर जहां शादी के बाद नवविवाहित जोड़े भविष्य के सपने संजोते हैं, वहीं सौरभ ने शादी के केवल 10 दिन बाद देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

कर्तव्य से बड़ा कोई रिश्ता नहीं
सौरभ कटारा ने हाल ही में सात फेरे लेकर अपने जीवन की एक नई शुरुआत की थी। लेकिन जब देश ने पुकारा, तो उन्होंने हँसते हुए वर्दी पहनी और ड्यूटी पर लौट गए। किसी ने सोचा भी नहीं था कि शादी के 10वें दिन ही वो तिरंगे में लिपटकर घर लौटेंगे। उनका यह बलिदान बताता है कि एक सच्चा सैनिक न तो रिश्तों से बंधा होता है, न ही आराम से — उसके लिए सबसे बड़ा रिश्ता सिर्फ देश होता है।

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