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सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता और दिखावे की अंधी दौड़ अब सिर्फ स्क्रीन तक सीमित नहीं रही, इसका असर सीधे हमारे समाज और सोच पर पड़ रहा है।
हमें ये समझना होगा कि कुछ लाइक्स और व्यूज़ के लिए अपनी मर्यादा, संस्कार और जिम्मेदारी को दांव पर लगाना कहीं से भी सही नहीं है।
अगर सच में एक बेहतर समाज बनाना है, तो शुरुआत हमें खुद से करनी होगी — अपने कंटेंट, अपनी सोच और अपनी सीमाओं से।
👉 आखिर सवाल ये है — क्या सोशल मीडिया पर भी कोई सीमा और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए?
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