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मात्र 34 वर्ष की आयु में 500 से अधिक घातक बमों को निष्क्रिय करने वाले एनएसजी के जांबाज बम निरोधक दस्ते के प्रमुख, लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार ने 2016 के पठानकोट हमले के दौरान अपनी वीरता की एक ऐसी मिसाल पेश की जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। आतंकियों द्वारा लगाए गए एक आत्मघाती बूबी-ट्रैप को निष्क्रिय करते समय जब धमाका हुआ, तब अपने साथी कमांडो की जान बचाने के लिए वह स्वयं एक ढाल की तरह आगे बढ़ गए और वीरगति को प्राप्त हुए। उनके इसी अदम्य साहस और कर्तव्य परायणता के लिए उन्हें मरणोपरांत 'शौर्य चक्र' से सम्मानित किया गया। केरल में जन्मे और बेंगलुरु में पले-बढ़े इस नायक ने साबित कर दिया कि एक सैनिक के लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। आइए, मातृभूमि के इस सच्चे सपूत की शहादत को नमन करें और उनके बलिदान की कहानी को हर घर तक पहुँचाएं। इस वीर सेनानी के सम्मान में कमेंट में 'जय हिंद' और 'ओम शांति' लिखकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें और इस पोस्ट को शेयर कर अधिक से अधिक लोगों को उनके पराक्रम से अवगत कराएं।

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