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फोन उनकी उंगलियों को "महसूस" करता है। वास्तव में, आपका स्मार्टफोन आपके स्पर्श को नहीं, बल्कि आपके भीतर बहने वाली बिजली (Electricity) को पहचानता है। पुराने समय के टचस्क्रीन (जो एटीएम या रेलवे स्टेशनों पर होते थे) दबाव पर काम करते थे, लेकिन आधुनिक फोन की स्क्रीन 'कैपेसिटिव' (Capacitive) तकनीक पर आधारित है।

यहाँ आपकी उंगलियों और स्क्रीन के बीच होने वाले उस 'इलेक्ट्रिक खेल' को विस्तार से समझाया गया है:

1. स्क्रीन के नीचे का 'बिजली का जाल'
हार्ड ग्लास की ऊपरी परत के ठीक नीचे तारों का एक बेहद बारीक और पारदर्शी जाल बिछा होता है।

इलेक्ट्रिक फील्ड: जब फोन ऑन होता है, तो इस जाल में लगातार बिजली दौड़ती है, जिससे स्क्रीन के ऊपर एक स्थिर इलेक्ट्रिक फील्ड (विद्युत क्षेत्र) बन जाता है।

इंसानी शरीर का रोल: हमारा शरीर 70% पानी और आयनों से बना है, जो बिजली के बहुत अच्छे सुचालक (Conductors) होते हैं।

2. 'कैपेसिटेंस' (Capacitance) में बदलाव
जैसे ही आप स्क्रीन को अपनी उंगली से छूते हैं, आपके शरीर की बिजली स्क्रीन के उस खास बिंदु (Point) से कुछ इलेक्ट्रॉन्स को अपनी ओर खींच लेती है।

डिस्टरबेंस: इससे उस जगह पर इलेक्ट्रिक फील्ड की ताकत अचानक गिर जाती है।

पहचान: फोन के सेंसर तुरंत जान लेते हैं कि किस 'X और Y' कोऑर्डिनेट पर बिजली कम हुई है। वे इस डेटा को प्रोसेसर के पास भेजते हैं, और फोन को पता चल जाता है कि आपने कहाँ क्लिक किया है।

3. दस्ताने या लकड़ी से क्यों नहीं चलता?
आपने गौर किया होगा कि साधारण दस्ताने पहनकर या पेंसिल की नोक से फोन चलाने पर वह काम नहीं करता:

इन्सुलेटर (Insulator): रबर, कपड़ा या लकड़ी बिजली के सुचालक नहीं होते। वे उंगली और स्क्रीन के बीच एक दीवार बन जाते हैं, जिससे शरीर का करंट स्क्रीन तक नहीं पहुँच पाता और इलेक्ट्रिक फील्ड में कोई बदलाव नहीं होता।

विशेष दस्ताने: मोबाइल के लिए आने वाले खास दस्तानों की उंगलियों में चांदी या तांबे के धागे बुने होते हैं, जो बिजली को स्क्रीन तक पहुँचाने का रास्ता बनाते हैं।

4. गीले हाथों से समस्या क्यों होती है?
जब स्क्रीन पर पानी की बूंदें गिर जाती हैं, तो टचस्क्रीन 'पागल' जैसा व्यवहार करने लगती है:

भ्रमित सेंसर: पानी भी बिजली का सुचालक है। स्क्रीन को लगता है कि पानी की हर बूंद एक 'उंगली' है। जब बहुत सारे बिंदुओं पर एक साथ बिजली का बदलाव होता है, तो फोन का प्रोसेसर भ्रमित हो जाता है कि असली क्लिक कहाँ हुआ है

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