#उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के कलेक्ट्रेट में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। तीन जूनियर लिपिक, जिनकी नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई थी, एक मिनट में 25 शब्द भी टाइप नहीं कर सके। लगातार दो बार टाइपिंग परीक्षा में असफल रहने के बाद जिलाधिकारी ने सख्त कदम उठाते हुए उनके पद को घटाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) बना दिया। प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव इन तीनों कर्मचारियों को मृतक आश्रित कोटे से जूनियर लिपिक के पद पर नियुक्त किया गया था। सरकारी नियमों के अनुसार, जूनियर लिपिक की नियुक्ति के बाद एक साल के अंदर टाइपिंग परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। परीक्षा में न्यूनतम गति एक मिनट में 25 शब्द टाइप करने की तय की गई है। इन तीनों कर्मचारियों ने इस मानक को पूरा नहीं किया।
#uttarpradesh #kanpur— at कानपुर.

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