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एक गाँव में कृष्णा बाई (सुखिया) नाम की निर्धन वृद्धा रहती थी, जो दूसरों के घरों में काम करके अपना जीवन यापन करती थी। वह भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थी और प्रतिदिन मेहनत से माला बनाकर उन्हें अर्पित करती थी। उसकी अटूट भक्ति देख भगवान ने उसे स्वप्न में आने वाले प्रलय की चेतावनी दी और गाँव छोड़ने को कहा।
जब कृष्णा बाई गाँव छोड़कर जाने लगी, तो गाँव वालों ने उसका उपहास किया। गाँव की सीमा पर पहुँचते ही भगवान ने उसे याद दिलाया कि वह माला बनाने वाली 'सुई' झोपड़ी में ही भूल आई है। सुई के प्रति भगवान की यह चिंता देख वह पुनः गाँव की ओर दौड़ी और सुई लेकर सुरक्षित बाहर आई। जैसे ही वह और उसे ले जाने वाला भक्त गाड़ीवान सुरक्षित स्थान पर पहुँचे, पूरा गाँव जलमग्न हो गया।
सीख: यह कथा सिखाती है कि भगवान अपने भक्त की छोटी-से-छोटी वस्तु (सुई) तक का ध्यान रखते हैं। जब तक भक्त की एक सुई भी गाँव में थी, भगवान ने प्रलय को रोक कर रखा। उनकी कृपा और सुरक्षा अपने भक्तों पर सदैव बनी रहती है।
मार्गदर्शक - श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज
प्रेरणास्त्रोत - श्री श्री १००८ श्री स्वामी हरिहरानंद जी महाराज , होलीपुरा

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