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'डीएम मैम, किताबों के दाम बहुत ज्यादा हैं, इन्हें कम करवा दीजिए, क्योंकि हर मां-बाप अमीर नहीं होते'। गंगेश्वरी विकास खंड के देहरी गुर्जर गांव की नौ वर्षीय बच्ची माही इन दिनों अपने 36 सेकेंड के वीडियो के कारण इंटरनेट मीडिया पर छाई है।

उसके भूमिहीन मजदूर पिता सोहित कुमार महंगाई की वजह से बेटी को किताबें नहीं दिला पा रहे हैं। माही की हाथ जोड़कर की गई अपील से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह अपने दर्द को शब्दों में ढालकर पूरे समाज से सवाल पूछ रही है।

खंड शिक्षा अनिल कुमार ने कहा कि छात्रा की प्रसारित वीडियो की जांच की जा रही है। स्कूल संचालक से भी बात की जाएगी। कस्बे के निजी स्कूल में पढ़ने वाली माही के पिता दिनभर की मेहनत से जो थोड़ी बहुत कमाई होती है, उसी से घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई चलती है।

माही का बड़ा भाई पंछी भी पढ़ाई के लिए अपने मामा के पास गजरौला में रह रहा है। नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही माही के लिए किताबें खरीदी गईं। जिनकी कीमत 3,100 रुपये बताई गई। खास बात यह है कि किताबें स्कूल से ही दी गई हैं।

हालांकि, मजदूर पिता अभी इनका भुगतान नहीं कर सका है। सोहित का कहना है यह रकम परिवार के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं थी। पिता के चेहरे की चिंता और घर की आर्थिक तंगी ने शायद माही को यह समझा दिया कि पढ़ाई अब सिर्फ मेहनत से नहीं, पैसे से भी जुड़ी हुई है।

शायद इसी दर्द ने बच्ची को कैमरे के सामने लाकर खड़ा कर दिया। न कोई शिकायत, न कोई गुस्सा, उसने सिर्फ एक विनम्र अपील की जो सीधे दिल तक पहुंचती है। लोगों का कहना है यह मासूम गुहार उन तमाम गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की सच्चाई बन गई है, जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए हर दिन संघर्ष कर रहे हैं।

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