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22 दिन... बेहिसाब दर्द और अमानवीय यातनाएं, लेकिन जुबान पर देश का एक भी राज़ नहीं!
कैप्टन सौरभ कालिया की शहादत सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि साहस की वो पराकाष्ठा है जिसे सुनकर आज भी हर भारतीय का खून खौल उठता है और सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। उन्होंने अपने शरीर का हर अंग देश के लिए न्योछावर कर दिया, लेकिन दुश्मन के आगे घुटने नहीं टेके।

ऐसे वीर सपूत के बलिदान को कोटि-कोटि नमन। 🙏
जय हिन्द!

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