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यह एक प्रेरणादायक कहानी है ❤️। दिल्ली की सड़कों से सामने आई इस कहानी ने सबका दिल जीत लिया है। 12 वर्षीय यह बालक न केवल स्वयं स्कूल जाता है, बल्कि शाम को अपने जैसे जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करने का भी बीड़ा उठाया है। सीमित संसाधनों के बावजूद, पुल के नीचे बैठकर नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करना उसकी निस्वार्थ भावना को दर्शाता है। यद्यपि उसके पास न तो बड़ा विद्यालय है और न ही पर्याप्त संसाधन, फिर भी उसका अध्यापन कौशल किसी अनुभवी शिक्षक से कम नहीं है। इस कहानी से यह संदेश मिलता है कि बड़ा बनने के लिए उम्र नहीं, बल्कि बड़ी सोच और संकल्प की आवश्यकता होती है।

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