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20 नवंबर 1942 को एक यात्री-मालवाहक जहाज मुंबई से दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना हुआ लेकिन कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सका। जापानी नौसेना ने टॉरपीडो से हमला करते हुए इसे डुबो दिया उड़ा दिया। अरबों के खजाने के साथ डूबे इस जहाज का नाम एसएस तिलवा था लेकिन इसे 'इंडियन टाइटैनिक' के नाम से दुनिया में जाना गया। यह सैकड़ों लोगों और अरबों रुपए के खजाने के साथ समुद्र में समा गया था। इस खजाने को 75 वर्षों बाद खोजा गया तो ये पूरा मामला काफी समय तक एक मुश्किल कानूनी लड़ाई में फंसा रहा।
एसएस तिलवा के डूबने के समय इसमें 732 यात्रियों सहित 958 लोग थे। इस जहाज में 6,000 टन माल भरा था, जिसमें 60 टन चांदी की छड़ें (43 मिलियन डॉलर की कीमत) थीं। 23 नवंबर, 1942 को जापानी पनडुब्बी के टॉरपीडो से टक्कर के बाद यह जहाज सेशेल्स से 930 मील उत्तर पूर्व में हिंद महासागर में डूब गया। काफी लोग जहाज की जीवनरक्षक नौकाएं से बच गए लेकिन इसके बावजूद हादसे में 280 लोगों की जान गई। इस जहाज के साथ डूबे खजाने की तलाश लंबे समय तक चली। जहाज का कीमती सामान 75 साल बाद 2017 में ब्रिटिश कंपनी ने बरामद किया। इसके बाद इस पर लंबे समय तक अदालतों में विवाद चलता रहा। आखिरकार 2024 में ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिण अफ्रीका को द्वितीय विश्व युद्ध के समय डूबे इस जहाज के अधिकार सौंप दिए।

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