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बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अकेले संविधान नहीं बनाया, ये बात बिल्कुल सही है।
फिर भी पूरी दुनिया उन्हें “संविधान निर्माता” और “भारतीय संविधान के पिता” क्यों कहती है?
क्योंकि:
✅ उन्होंने ड्राफ्टिंग कमिटी के चेयरमैन के रूप में सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभाली।
✅ 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन चले इस ऐतिहासिक कार्य में उन्होंने न सिर्फ बैठकें संचालित कीं, बल्कि हर अनुच्छेद पर गहन अध्ययन, बहस और अपनी बौद्धिक अंतर्दृष्टि दी।
✅ उन्होंने संविधान को लोकतंत्र, समानता, न्याय और सामाजिक न्याय का मजबूत आधार दिया।
✅ बाबासाहेब की दूरदृष्टि, कानूनी विद्वता और सामाजिक अनुभव ने संविधान को वो आकार दिया जो आज भी हमारी राष्ट्रीय पहचान है।
दूसरे सदस्य भी महत्वपूर्ण थे, लेकिन नेतृत्व, दृष्टि और योगदान का केंद्र बिंदु बाबासाहेब ही थे। इतिहास हमेशा मुख्य शिल्पकार को याद रखता है।
तो सवाल ये नहीं कि “दुनिया गलत है या विरोध करने वाले” —
सवाल ये है कि सच्चाई को सम्मान दें।
बाबासाहेब का योगदान अतुलनीय है। इसे कम करके आंकना अन्याय है।
जय भीम! जय संविधान! 🇮🇳
— डीएसपी संतोष पटेल

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