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वो लड़की…
जो कभी अपने मायके की रानी हुआ करती थी,
आज ससुराल में हर रोज़ अपने आँसू छुपाकर जी रही है…

उसकी खामोशी को लोग उसकी कमजोरी समझ बैठे,
और उसके सहने को उसकी आदत…

हर रात वो खुद से एक ही सवाल करती है—
“क्या मेरी गलती सिर्फ इतना है कि मैं लड़की हूँ…?”

जिस भाई ने बचपन में उसके लिए दुनिया से लड़ने की कसम खाई थी,
आज वही भाई… उसकी आँखों के आँसू देखकर भी चुप है…

क्योंकि समाज ने उसे सिखाया है—
“बहन का दर्द नहीं, इज़्ज़त बचानी है…”

और वो लोग…
जो खुद शराब पीकर अपनी ही पत्नी पर हाथ उठाते हैं,
वो ही अपनी बहन के लिए रिश्ता देखते वक्त पूछते हैं—
“लड़का नशा तो नहीं करता…?”

कितनी अजीब है ये दुनिया…
जहाँ दर्द देने वाला भी इज्ज़तदार कहलाता है,
और सहने वाली लड़की… बदनाम हो जाती है…

वो लड़की आज भी वहीं खड़ी है—
एक उम्मीद के साथ…
कि शायद एक दिन कोई तो होगा…
जो उसे समझेगा,
बिना जज किए…

पर सच तो ये है—
उसे अब किसी का सहारा नहीं,
बस खुद की ताकत बनना है… 💔



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