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हमारा मन एक बेहद शक्तिशाली इंजन की तरह है जो हमारे पूरे जीवन की दिशा तय करता है। जब हम अपने भीतर बीमारी या कमजोरी के विचारों को जगह देते हैं, तो हम अनजाने में अपने शरीर को हार मानने का संदेश भेज रहे होते हैं।

विज्ञान और अनुभव दोनों यही कहते हैं कि हमारे विचार सीधे हमारी कोशिकाओं पर असर डालते हैं। अगर आप गौर करेंगे, तो पाएंगे कि जैसे ही आप खुद को उत्साही और स्वस्थ महसूस करना शुरू करते हैं, आपके शरीर की ऊर्जा बदलने लगती है। यह मन ही है जो प्राण बनकर इस हाड़-मांस के शरीर को चला रहा है। यदि चालक ही घबरा जाए, तो गाड़ी का डगमगाना निश्चित है। इसलिए, बीती बातों का शोक मनाना या भविष्य की चिंता में घुलना छोड़ दीजिए।

फिक्र केवल शरीर को गलाती है, जबकि सकारात्मक सोच उसे नया जीवन देती है। खुद को भीतर से मजबूत बनाइए, फिर शरीर खुद-ब-खुद आपका साथ देने लगेगा।

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