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गंगाबिशन अग्रवाल, जिन्हें भारत का ‘भुजिया किंग’ कहा जाता है, ने अपने सफर की शुरुआत 1937 में बीकानेर की एक छोटी-सी दुकान से की थी। उन्होंने पारंपरिक भुजिया में बदलाव करते हुए मोठ की दाल का उपयोग किया, जिससे इसका स्वाद और कुरकुरापन बढ़ गया। साथ ही, भुजिया को पतला बनाकर उन्होंने खाने का तरीका भी बदल दिया। उस समय बीकानेर के महाराजा डूंगर सिंह के नाम पर इसे ‘डूंगर सेव’ कहा गया, जो जल्दी ही लोकप्रिय हो गया।

बाद में उनके पोते मोतीलाल अग्रवाल ने इस व्यवसाय को राजस्थान से बाहर कोलकाता, नागपुर और दिल्ली तक फैलाया। उन्होंने 1970-80 के दशक में आधुनिक पैकेजिंग की शुरुआत की, जिससे भुजिया देश-विदेश तक पहुंच सकी। 1982 में दिल्ली के चांदनी चौक में पहला स्टोर खुलने के बाद ब्रांड को राष्ट्रीय पहचान मिली। आज यह विरासत परिवार के अलग-अलग सदस्यों द्वारा संभाली जा रही है और भुजिया के साथ-साथ मिठाइयों और रेस्टोरेंट व्यवसाय में भी विस्तार हो चुका है।

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