गोंडवाना साम्राज्य के चांदागढ़ रियासत की महान आदिवासी गोंड शासिका, निडर, महान योद्धा, अपने शासनकाल में एक भी युद्ध न हारने वालीं, नीतिज्ञ व प्रजा हितैषी, कुशल प्रशासिका एवं सुधारिका, विदर्भ-चांदा की शिल्पकार, राजमाता महारानी हिराई शाह आत्राम जी की पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन🌼🙏🏼
अपने पति राजा विर शाह के मरणोपरांत सन् 1704 से लगभग 15 साल महारानी हिराई शाह ने गोंडवाना साम्राज्य की बागडोर संभाली। एक सशक्त महिला शासक के रूप में उनका कार्यकाल याद किया जाता है। महारानी हिराई ने अनेक लोकोपयोगी कार्य किये। उन्होंने आत्राम राजवंश के पूरखों के समाधी, राजा विर शाह की समाधी स्थल, कई किले, महल, तोपें, तालाब, घाट, नहर, बाजार हाट आदि बनवाए। शिक्षा, कला-संगीत को बढ़ावा दिया। महारानी हिरई ने स्वर्ण, चाँदी और तांबे के सिक्के चलवाए। प्रजा स्वर्ण मुद्रा में लगान देती थी।

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