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१. मकरध्वज का रहस्यमय जन्म
जब हनुमान जी लंका दहन के बाद अपनी पूँछ की अग्नि शांत करने समुद्र में उतरे, तो उनके शरीर से गिरे स्वेद (पसीने) की एक बूंद को एक मछली (मकर) ने निगल लिया। इससे वह गर्भवती हो गई। जब अहिरावण के सेवकों ने उस मछली को पकड़ा, तो उसके पेट से एक वानर रूपी बालक निकला, जिसे मकरध्वज कहा गया। अहिरावण ने उसे पाताल लोक के द्वार का रक्षक नियुक्त कर दिया।

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