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अर्देशिर गोदरेज भारत के उन शुरुआती उद्यमियों में से थे जिन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में काम किया। पहले वकील बनने की कोशिश असफल होने के बाद उन्होंने 1895 में सर्जिकल उपकरण और फिर ताले बनाने का व्यवसाय शुरू किया।
साबुन निर्माण में उनकी रुचि तब जागी जब उन्होंने देखा कि उस समय सभी साबुन पशु चर्बी से बनते थे, जिससे कई लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत होती थीं। इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने 1919 में दुनिया का पहला शाकाहारी साबुन वनस्पति तेल से बनाया, जिसे ‘छवि’ नाम दिया गया। बाद में उन्होंने ‘गोदरेज No. 1’ ब्रांड लॉन्च किया, जो आज भी बेहद लोकप्रिय है और हर साल करोड़ों यूनिट्स बिकते हैं। महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और अन्य नेताओं ने उनके स्वदेशी प्रयासों का समर्थन किया। अर्देशिर का मानना था कि भारतीय उत्पाद सिर्फ स्वदेशी ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता में भी विश्वस्तरीय होने चाहिए।

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