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मुफ्त की पपड़ी और 'आग' बराबर की नफरत

​उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने "कस्टमर इज किंग" वाली बात को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया। अमूमन गोलगप्पे खाने के बाद लोग 'सूखी पपड़ी' मांगते हैं ताकि तीखेपन को शांत किया जा सके, लेकिन यहाँ तो पपड़ी न मिलने पर कस्टमर का पारा ही चढ़ गया। जब दुकानदार ने पपड़ी देने से मना किया, तो उस शख्स के अंदर का 'एंग्री यंग मैन' जाग उठा। उसे लगा कि यह सिर्फ पपड़ी का इनकार नहीं, बल्कि उसके आत्मसम्मान पर करारा प्रहार है।

​कहासुनी गाली-गलौज में बदली और फिर जो हुआ वह किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं था। भाई साहब ने पपड़ी की कमी का बदला पूरी दुकान में आग लगाकर लिया। अब बेचारा दुकानदार धुएं में अपनी रोजी-रोटी ढूंढ रहा है और 'पपड़ी प्रेमी' महोदय सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में अपनी 'बहादुरी' के जलवे बिखेर रहे हैं। पुलिस अब उन्हें वो वीआईपी पपड़ी खिलाने की तैयारी कर रही है जो सिर्फ जेल की सलाखों के पीछे मिलती है।

​अगली बार गोलगप्पे खाएं, तो पपड़ी न मिलने पर शांति से घर चले जाएं, वरना पपड़ी के चक्कर में जिंदगी 'कड़क' हो सकती है।

​बाकी भाई, इतना गुस्सा सेहत के लिए ठीक नहीं है। अगली बार थोड़ा प्यार से मांग लेना, क्या पता दो पपड़ी एक्स्ट्रा मिल जाएं!
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