पंजाब में अपनों के विदेश जाने और काम में व्यस्त होने के कारण उपजा 'अकेलापन' अब एक सामाजिक संकट और नया बिजनेस बन गया है। जालंधर, अमृतसर और लुधियाना जैसे शहरों में अब ऐसी कंपनियां उभर रही हैं जो फीस के बदले बुजुर्गों को 'किराये की संतान' यानी अटेंडेंट मुहैया कराती हैं। ये अटेंडेंट केवल केयरटेकर नहीं, बल्कि दोस्तों की तरह बुजुर्गों के साथ लूडो खेलते हैं, अखबार पढ़कर सुनाते हैं और उनके पुराने किस्से सुनते हैं। जालंधर में ही ऐसी 40 कंपनियां और करीब 750 अटेंडेंट इस इकोसिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं, जो 1000 रुपये प्रतिदिन की दर पर सेवाएं दे रहे हैं। यह हकीकत दिखाती है कि आलीशान कोठियों के भीतर बुजुर्गों का एकांत कितना गहरा है, जहाँ अब खून के रिश्तों की जगह 'प्रोफेशनल अपनेपन' ने सहारा लेना शुरू कर दिया है।
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