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उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिला के केरन सेक्टर में आं’तकवादी सीमा के अंदर घुसपैठ कर रहे थे. इसी दौरान जब सेना की टुकड़ी और आं’तकवादी के बीच मुठभेड़ हुई, उसमें पैरा कमांडो बालकृष्ण महज 25 साल की उमर में शहीद ही गए थे।

जिसके बाद बालकृष्ण के पिता महेंद्र को बॉर्डर से फोन आया कि, आपका बेटा शहीद हो गया है। यह सुनते ही पिता महेंद्र सन्न रह गए। लेकिन उन्होंने यह बात परिवार में किसी को नहीं बताई। अपने जिगर तले बेटे की शहादत छुपा ली।

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