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“जब बच्चे ‘पापा’ कहकर पुकार रहे थे… वही पिता उन्हें आग में झोंक रहा था।”
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।
यहां एक पिता ने अपने ही दो मासूम बेटों को जिंदा जलाने की कोशिश कर डाली।
🚨 क्या हुआ उस शाम?
शुक्रवार शाम करीब 5 बजे तिवारी मोहल्ले में रहने वाले राघवेंद्र तिवारी ने अपने 8 साल के बेटे जय और 5 साल के बेटे हर्ष मणि को कमरे में बंद कर दिया…
और फिर आग लगा दी।
उसी समय बच्चों की मां का फोन आया…
फोन उठाते ही उसने जो सुना, वो किसी भी मां के लिए सबसे बड़ा डरावना सपना है—
“मम्मी… बचाओ… पापा मत जलाओ…”
⚠️ पड़ोसियों ने बचाई जान
घर से धुआं उठता देख पड़ोसियों को शक हुआ।
उन्होंने दरवाजा तोड़ा और अंदर घुसे।
कमरे में धुआं भरा था…
दोनों बच्चे कोने में सहमे हुए थे…
आग तेजी से फैल रही थी।
लोगों ने किसी तरह आग बुझाई और बच्चों को बाहर निकाला।
😡 बचाने से भी रोक रहा था पिता
सबसे चौंकाने वाली बात—
जब पड़ोसी बच्चों को बचाने पहुंचे, तो आरोपी पिता उन्हें रोकने लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह पत्थर लेकर खड़ा था और कह रहा था—
“क्यों बचा रहे हो?”
🏥 बच्चे खतरे से बाहर, लेकिन सदमे में
इस हादसे में दोनों बच्चों के हाथ-पैर हल्के झुलस गए हैं।
उन्हें नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
डॉक्टरों के अनुसार बच्चे अब खतरे से बाहर हैं,
लेकिन इतना डर गए हैं कि ठीक से बोल भी नहीं पा रहे।
🔍 तांत्रिक एंगल की जांच
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पिता किसी तांत्रिक के संपर्क में था।
पुलिस इस एंगल से जांच कर रही है कि कहीं इसी के कहने पर तो उसने यह खौफनाक कदम नहीं उठाया।
💬 अब सवाल आपसे…
* क्या अंधविश्वास इंसान को इतना अंधा बना सकता है कि वह अपने ही बच्चों की जान लेने पर उतर आए?
* ऐसे मामलों में समाज और परिवार की क्या जिम्मेदारी बनती है?
* क्या अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कानून और जागरूकता जरूरी नहीं है?
👇 अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं…
क्योंकि ये सिर्फ एक घटना नहीं… इंसानियत पर सवाल है।
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