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जब से गायों के साथ जुड़ा हूं ,सुनता आ रहा था कि बंगाल से बहुत बड़ी संख्या में गायें बांग्लादेश में कटने के लिए रोज जाती थीं। कुछ अधिकारी ही पैसे ले कर इसमें मदद करते थे। गौरक्षकों पे जानलेवा हमले होते रहते थे। कभी सीमा सुरक्षा बल के जवान कुछ गायों को बचा पाते थे, तो वो कुछ संस्थाओं (NGOs) की देखरेख में रहती थीं। ये संस्थाएं भी इतनी गायों की देख रेख के लिए दान पर निर्भर थीं क्यूकी सरकार से इन्हे सहयोग नहीं मिलता था। दूध, गोबर और गोमूत्र से जुड़े व्यवसाय के लिए कई सालों से इनमे से कुछ संस्थाओं के संपर्क में मैं था।
सत्ता परिवर्तन अपने साथ व्यवस्था परिवर्तन भी लाता है। उम्मीद करता हूँ कि पश्चिम बंगाल भी गायों की सुरक्षा, सेवा और सम्मान के लिए देश भर में चल रहे अभियान में बढ़ चढ़ कर भाग लेगा। वहाँ की नयी सरकार से काफी उम्मीदें हैं। बंगाल के समर्पित गौपालकों और गौरक्षकों का उत्साह देख कर प्रसन्न हूँ।
वन्दे गौ मातरम !

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