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कुंभनदास जी और गोपी की कथा
गोवर्धन की एक सखी ने जब सुना कि ठाकुर जी गोपियों के घर माखन चुराने जाते हैं, तो उसके मन में भी यह भाव जागा कि वह ऐसा माखन बनाएगी जिसे चुराने स्वयं भगवान आएँ। वह रोज मंदिर जाती और श्रीनाथ जी को दूर से ही माखन का पात्र दिखाकर ललचाती। वह उनसे कहती कि मैंने बहुत मेहनत से यह माखन निकाला है, पर मैं इसे मंदिर में नहीं चढ़ाऊँगी; अगर तुम्हें इसे खाना है, तो मेरे घर चोरी करने आना। वह उन्हें अपने घर का पूरा रास्ता भी समझा देती।

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