शादी का सीज़न है बाराती भाई ध्यान दें!
खाने की खुशबू देखकर बारात में भीड़ बढ़ाना भारी पड़ सकता है
100 लोगों का इंतज़ाम हो और 200 बाराती पहुँच जाएँ
तो दूल्हे से ज़्यादा दौड़ बारातियों को लगानी पड़ सकती है इसलिए बारात उतनी ही ले जाएँ जितनों का सम्मानपूर्वक स्वागत हो सके।
वरना दावत की जगह “जमालघोटा एक्सप्रेस” चल सकती है
शादी में आनंद लेने जाएँ मेज़बान की मजबूरी समझें और अपनी मौजूदगी से खुशियाँ बढ़ाएँ परेशानी नहीं।
याद रखें:
बारात की शान संख्या से नहीं संस्कार और समझदारी से बढ़ती है
शादी खुशी का मौका है समझदारी से जाएँ और मुस्कान के साथ लौटें। 😊
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