रेंगने से शुरू हुआ सफर
चलना फिर दौड़ना सीख गए
किताबों सपनों और रिश्तों में
हम खुद को ही कहीं भूल गए
घर, परिवार, दौलत कमाते-कमाते
उम्र हाथों से फिसल जाती है
आख़िर में समझ आता है
ज़िंदगी सिर्फ़ जीने नहीं
महसूस करने के लिए आती है.. See less

image