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यादव था न बिहार में ये टाइटल ही अभिशाप है 😞
देश में जब भी किसी नेता या बड़े चेहरे के खिलाफ सोशल मीडिया पर कोई तीखी टिप्पणी होती है, अक्सर देखने को मिलता है कि पुलिस तुरंत सक्रिय हो जाती है। कई मामलों में घंटों के भीतर कार्रवाई, गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लेकिन सवाल तब उठने लगता है जब आम लोगों से जुड़े गंभीर मामलों में वही तत्परता दिखाई नहीं देती।हाल के दिनों में एक मामला चर्चा में रहा, जिसमें बिहार के रहने वाले पांडव कुमार की मौत को लेकर लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिली। बिहारी कहकर दिल्ली पुलिस ने सीना में गोली उतार दिया था तब यही केंद्रीय मंत्री से इसके बारे में पूछा गया तो बताया था अरे हो गया तो हो गया अभी हाल ही में राजेश राव कर के व्यक्ति ने थोड़ा अमर्यादित टिप्पणी की थी मानते है लेकिन यही बात वो भी बोला था की आपके साथ या आपके परिवार के साथ भी घटना घटता है तो हम भी कहेंगे हो गया तो हो गया लेकिन राजेश राव को पुलिस उठा लेती है अगर किसी आम युवक के साथ अन्याय हो जाए, तब नेताओं के बयान कुछ भी दे दे चलेगा यादवो को बिहार छोड़ने की बात कह दी कोई पूछने वाला नहीं मिला ऐसा क्यों कहा लेकिन यही इनके खिलाफ बोल दिया तो जातिसूचक और धमकी के आरोप में गिरफ्तार करवा दिया
यही वजह है कि लोगों के बीच “दोहरी नीति” और “दोहरा चरित्र” जैसे सवाल उठने लगे हैं।
जनता का गुस्सा सिर्फ किसी एक घटना को लेकर नहीं होता, बल्कि तब बढ़ता है जब उन्हें लगता है कि कानून का व्यवहार सभी के लिए बराबर नहीं है। एक तरफ नेताओं पर टिप्पणी करने वालों पर तेज कार्रवाई, दूसरी तरफ आम लोगों के मामलों में धीमी प्रतिक्रिया—यही तुलना लोगों को बेचैन करती है।
लेकिन ऐसे माहौल में सबसे जरूरी बात है संयम। गुस्से में उठाया गया एक गलत कदम आपके लिए सही नहीं है सोशल मीडिया पर भड़काऊ माहौल बनना आसान है, लेकिन उसका नुकसान अक्सर आम लोगों को ही उठाना पड़ता है। हाल में कुछ लोगों की गिरफ्तारी के बाद यह बात फिर सामने आई कि भावनाओं में बहकर कानून हाथ में लेना किसी समस्या का समाधान नहीं बनता।आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन संविधान और कानून के दायरे में रहकर। सवाल पूछना लोकतंत्र की ताकत है, मगर हिंसा या जल्दबाज़ी में किया गया कोई कदम आंदोलन की ताकत को कमजोर कर देता है।आज जरूरत सिर्फ गुस्सा दिखाने की नहीं, बल्कि समझदारी से अपनी बात रखने की है। क्योंकि कई बार कुछ लोग माहौल को भड़काकर पीछे हट जाते हैं, लेकिन नुकसान उन लोगों का होता है जो भावनाओं में बहकर आगे निकल जाते हैं लेकिन सवाल वही क्या आम आदमी के ऊपर ऐसे ही कोई टिप्पणी कर के निकल जाए कोई कुछ नहीं कर सकता पूछता है भारत 😞
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