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खेल सिर्फ ताकत का नहीं, जुनून, दर्द सहने की क्षमता और हार न मानने वाले हौसले का भी नाम है।
हैदराबाद के Lal Bahadur Stadium में आयोजित “तेलंगाना केसरी” कुश्ती प्रतियोगिता में Abu Bakar Bin Abdullah Bamas ने ऐसा जज़्बा दिखाया, जिसने हर दर्शक को भावुक कर दिया।
टूर्नामेंट के दौरान उन्हें कुल 6 कठिन मुकाबले लड़ने थे। शुरुआती चार मुकाबलों में उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। लेकिन सेमीफाइनल में एक खतरनाक दांव के दौरान उनके सिर पर गंभीर चोट लग गई और मैदान पर ही खून बहने लगा।
स्टेडियम में मौजूद लोगों को लगा कि अब उनका सफर यहीं खत्म हो जाएगा। लेकिन असली खिलाड़ी वही होता है, जो मुश्किल समय में खुद को साबित करता है।
सिर्फ आधे घंटे के इलाज और सिर पर पट्टी बंधवाने के बाद अबू बकर दोबारा अखाड़े में उतरे। फाइनल मुकाबले में उन्होंने दर्द और थकान को पीछे छोड़ते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर लगातार दूसरी बार “तेलंगाना केसरी” का खिताब जीत लिया।
उनकी यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उस जिद और जुनून की मिसाल है, जो इंसान को गिरकर भी दोबारा खड़ा होना सिखाती है।

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