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कुछ दिन पहले देहरादून में कुछ होर्डिंग्स देखे जिन पर विश्वविद्यालय अपने छात्रों के नाम और उनके वेतन पैकेज बड़े गर्व से लिख रही हैं — बड़ी तकनीकी कंपनियों में नियुक्ति के साथ।
इरादा समझ आता है। यह प्रचार है। लेकिन यह गलत है और इस पर बात होनी चाहिए।
**विश्वविद्यालयों को यह क्यों बंद करना चाहिए*
- **निजता का उल्लंघन** — वेतन एक व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी है। बिना सहमति के इसे सार्वजनिक करना बिल्कुल गलत है।
- **सुरक्षा का खतरा** — सार्वजनिक रूप से बड़ा वेतन दिखाना युवाओं को निशाना बना सकता है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है।
- **व्यावसायिक नुकसान** — अधिकांश नियुक्ति अनुबंधों में गोपनीयता की शर्त होती है। यह प्रकटीकरण छात्रों को उनकी कंपनी की नीतियों के विरुद्ध खड़ा कर सकता है।
- **मानसिक दबाव** — अभी पढ़ रहे छात्रों के लिए अपने साथी का वेतन होर्डिंग पर देखना अनावश्यक तनाव और तुलना पैदा करता है।
- **भविष्य पर असर** — वेतन सार्वजनिक होने से भविष्य में बातचीत और करियर पर भी असर पड़ सकता है।
विश्वविद्यालयों को नियुक्ति का उत्सव मनाने का पूरा हक है — कंपनियों के नाम बताएं, क्षेत्र बताएं, संख्या बताएं — लेकिन **किसी छात्र का वेतन आपका बताने के लिए नहीं है।**
यह उत्सव नहीं, बल्कि एक छात्र की सफलता का संस्थागत प्रचार के लिए उपयोग है।
सभी विश्वविद्यालय प्रबंधन से निवेदन है — कृपया इस प्रथा पर पुनर्विचार करें। अपने छात्रों का उत्सव मनाएं, उन्हें उजागर न करें।

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