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शहीद बेटे को देश का दूसरा सबसे बड़ा वीरता सम्मान मिलना था, लेकिन मंच तक पहुंचने से पहले ही मां का दर्द आंसुओं में बह निकला। बेटे की याद में फूट-फूटकर रो रही मां को देखकर राष्ट्रपति खुद प्रोटोकॉल तोड़कर उनके पास पहुंचीं और कीर्ति चक्र सौंपा। राष्ट्रपति भवन का यह दृश्य सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि एक मां के दर्द, एक बेटे के बलिदान और पूरे देश की भावनाओं का ऐसा पल था जिसने हर आंख को नम कर दिया।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। देश की सेवा में उनकी असाधारण वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान को इस सम्मान के जरिए नमन किया गया। समारोह में मौजूद हर व्यक्ति इस वीर सपूत की कहानी सुनकर भावुक हो उठा।
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