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एक ऐसे महान योद्धा, जिन्होंने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करते हुए इतिहास में अमर स्थान प्राप्त किया।
बाबा बंदा सिंह बहादुर का जन्म 1670 ई. में कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में राजपूत (मिन्हास) कुल में हुआ था। उनका वास्तविक नाम लक्ष्मण देव था। युवावस्था में वे वैराग्य के मार्ग पर चले और माधोदास बैरागी के नाम से प्रसिद्ध हुए।
सन् 1708 में नांदेड़ में उनकी भेंट दसवें सिख गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से हुई। गुरु जी के प्रेरणादायक उपदेशों ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। धर्म, समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए उन्होंने शस्त्र धारण किए और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प लिया।
पंजाब पहुँचकर उन्होंने मुगल अत्याचारों के खिलाफ जनशक्ति को संगठित किया। 1710 में सरहिंद विजय प्राप्त कर खालसा राज की नींव रखी।⚔️ उन्होंने अत्याचारियों को परास्त कर पीड़ित जनता को न्याय दिलाया। वे उन पहले महान सेनानायकों में से थे जिन्होंने मुगलों के अजेय होने के भ्रम को तोड़ा।
अंततः 1716 ई. में दिल्ली में उन्हें और उनके साथियों को अमानवीय यातनाएँ देकर बलिदान दे दिया गया, लेकिन उनका साहस, त्याग और धर्मरक्षा का संकल्प आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा देता है।
काटे सिर उन मुगलों के जिसने,गोविंद के पुत्रों को चिनवाया था,दे दिया बलिदान उस वीर ने,क्षत्रिय धर्म निभाया था।
बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन वीरता, त्याग, धर्मरक्षा और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का अमर प्रतीक है।
बाबा बंदा सिंह बहादुर के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन। 🙏🚩

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