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क्या यह सही है...?? मैं इस पद्धति से सहमत नहीं हूँ....
प्रचारक जीवन दोधारी तलवार पर चलने के समान होता है उस पर इस तरह की प्रशंसा भरी शुभकामना , किसी प्रचारक के लिए कठिनाई का कारण बन सकती है।
प्रचारक में विशेषत्व तो हो सकता है पर देवत्व प्रदान करने का जो उपक्रम इस तरह के राजनेता करते हैं वह प्रचारक के ध्येय मार्ग में बाधक है। छपास की यह बीमारी नेताजी के साथ साथ शुभकामना पाने वाले के लिए भी घातक है....
बाकी क्या सही और क्या गलत है यह निर्णय मैं स्वयंसेवकों के विवेक पर छोड़ता हूँ..... 🙏🙏🙏

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