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ऐसी खबरें पढ़कर दिल भारी हो जाता है… अगर कहीं भी, किसी भी रूप में मासूम बच्चों और निर्दोष लोगों पर हिंसा हो रही है, तो वह सिर्फ दर्द ही नहीं बल्कि इंसानियत पर सवाल है।

युद्ध, हिंसा और नफरत का सबसे बड़ा शिकार हमेशा आम लोग ही बनते हैं—बच्चे, महिलाएं, और वो परिवार जो सिर्फ एक शांत जिंदगी चाहते हैं।

कभी सोचा है कि आखिर कब तक ये खून-खराबा चलता रहेगा?
कब दुनिया ताकत और राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत को चुनेगी?

आज जरूरत शोर मचाने की नहीं, बल्कि शांति, संवाद और मानवता को बचाने की है।
हर मासूम जिंदगी की कीमत होती है—और उसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

🙏 बस अब और नहीं… शांति चाहिए, इंसानियत चाहिए।

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