3 horas - Traduzir

11अप्रैल और भारतीय खेल वैश्विक मंच पर गूंजता तिरंगा,रेडियो से शुरू हुआ सफर आज बना स्पोर्ट्स सुपरपावर
झांसी।आज 11 अप्रैल का दिन भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद अनूठा है। साल 1921 में आज ही के दिन दुनिया में पहली बार खेल की लाइव रेडियो कमेंट्री का प्रसारण हुआ था, जिसने भारत में खेल क्रांति की नींव रखी। आज जब हम इस ऐतिहासिक दिन को याद कर रहे हैं, तो भारतीय खेलों का ग्राफ दुनिया में एक स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रहा है। क्रिकेट की पिचों से लेकर शतरंज के बोर्ड और एथलेटिक्स के मैदानों तक, भारतीय खिलाड़ियों ने वैश्विक पटल पर तिरंगे का मान बढ़ाया है।हालिया समय में भारत ने खेल जगत के हर कोने में अपनी धाक जमाई है। क्रिकेट में रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्जा किया, वहीं हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में महिला टीम ने वनडे विश्व कप जीतकर नया इतिहास रचा। एथलेटिक्स में 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में ऐतिहासिक 90 मीटर की बाधा को पार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
बौद्धिक खेलों की बात करें, तो शतरंज (Chess) में युवा ग्रैंडमास्टर डी. गुकेश और आर. प्रज्ञानंद ने सुपरबेट क्लासिक और टाटा स्टील मास्टर्स जीतकर दुनिया में भारत का लोहा मनवाया, जबकि महिला वर्ग में दिव्या देशमुख एफआईडीई विश्व कप चैंपियन बनीं। पैरा-स्पोर्ट्स में शीतल देवी और सुमित अंतिल जैसे सूरमाओं ने पैरालंपिक और विश्व पैरा चैंपियनशिप में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।शूटिंग विश्व चैंपियनशिप में निशानेबाज सम्राट राणा 10 मीटर एयर पिस्टल के विश्व चैंपियन बने, तो मुक्केबाजी में जैस्मिन लम्बोरिया ने देश को स्वर्ण दिलाया। हमारी राष्ट्रीय पहचान हॉकी टीम ने एशिया कप जीतकर महाद्वीप पर अपना दबदबा कायम रखा है। इसके साथ ही, भारत ने अपनी जड़ों को नहीं भुलाया है; पहले विश्व योगासन चैंपियनशिप में रिकॉर्ड 102 स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ खो-खो और स्कॉश विश्व कप में भी भारत विश्व विजेता बनकर उभरा है। 11 अप्रैल का यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत अब केवल खेलों में भाग लेने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को जीतने वाला एक 'स्पोर्ट्स सुपरपावर' बन चुका है।
आज 11 अप्रैल का दिन भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद अनूठा है। साल 1921 में आज ही के दिन दुनिया में पहली बार खेल की लाइव रेडियो कमेंट्री का प्रसारण हुआ था, जिसने भारत में खेल क्रांति की नींव रखी। आज जब हम इस ऐतिहासिक दिन को याद कर रहे हैं, तो भारतीय खेलों का ग्राफ दुनिया में एक स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रहा है। क्रिकेट की पिचों से लेकर शतरंज के बोर्ड और एथलेटिक्स के मैदानों तक, भारतीय खिलाड़ियों ने वैश्विक पटल पर तिरंगे का मान बढ़ाया है।हालिया समय में भारत ने खेल जगत के हर कोने में अपनी धाक जमाई है। क्रिकेट में रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्जा किया, वहीं हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में महिला टीम ने वनडे विश्व कप जीतकर नया इतिहास रचा। एथलेटिक्स में 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में ऐतिहासिक 90 मीटर की बाधा को पार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
बौद्धिक खेलों की बात करें, तो शतरंज में युवा ग्रैंडमास्टर डी. गुकेश और आर. प्रज्ञानंद ने सुपरबेट क्लासिक और टाटा स्टील मास्टर्स जीतकर दुनिया में भारत का लोहा मनवाया, जबकि महिला वर्ग में दिव्या देशमुख एफआईडीई विश्व कप चैंपियन बनीं। पैरा-स्पोर्ट्स में शीतल देवी और सुमित अंतिल जैसे सूरमाओं ने पैरालंपिक और विश्व पैरा चैंपियनशिप में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।शूटिंग विश्व चैंपियनशिप में निशानेबाज सम्राट राणा 10 मीटर एयर पिस्टल के विश्व चैंपियन बने, तो मुक्केबाजी में जैस्मिन लम्बोरिया ने देश को स्वर्ण दिलाया।
हमारी राष्ट्रीय पहचान हॉकी टीम ने एशिया कप जीतकर महाद्वीप पर अपना दबदबा कायम रखा है। इसके साथ ही, भारत ने अपनी जड़ों को नहीं भुलाया है, पहले विश्व योगासन चैंपियनशिप में रिकॉर्ड 102 स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ खो-खो और स्कॉश विश्व कप में भी भारत विश्व विजेता बनकर उभरा है। 11 अप्रैल का यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत अब केवल खेलों में भाग लेने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को जीतने वाला एक स्पोर्ट्स सुपरपावर बन चुका है।

image