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हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय सेना में कैप्टन बनने तक का सुनैना सिंह का सफर संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी है। वर्ष 2010 में सेना में शामिल होकर उन्होंने अपने गांव की पहली महिला अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया।
सुनैना सिंह को सेना में जाने की प्रेरणा अपने स्वतंत्रता सेनानी दादा से मिली थी। उन्होंने बचपन से ही देश सेवा का सपना देखा और उसी दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। हालांकि जब उन्होंने सेना में जाने का फैसला किया, तब उनके परिवार को सामाजिक आलोचनाओं और तानों का सामना करना पड़ा।
लोगों ने उनके पिता से कहा कि सेना लड़कियों के लिए नहीं है, लेकिन सुनैना ने अपनी मेहनत और उपलब्धियों से इस सोच को गलत साबित कर दिया। उन्होंने शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करते हुए लगभग 10 वर्षों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं।
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने शिक्षा और मार्गदर्शन के क्षेत्र में अपना योगदान जारी रखा। उन्होंने एमबीए और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की, दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया और सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (SS में मेंटर के रूप में भी कार्य किया।
सुनैना सिंह की यह यात्रा न केवल महिलाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के सामने सामाजिक बाधाएं टिक नहीं सकतीं। उनकी कहानी आज देशभर की युवा पीढ़ी को अपने सपनों का पीछा करने का संदेश देती है।

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