आपका जो कर्म है वह किसी का उधार नहीं रखता है,

इसलिए जो आप किसी और को दे रहे हैं वह एक दिन आपके पास ही आना है फिर चाहे प्यार हो, नफ़रत हो या बफ़ादारी हो या फिर दग़ाबाज़ी।