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भीड़ इतनी ज्यादा कि सांस लेना भी मुश्किल… और उसी भीड़ में एक महिला दरवाजे पर फंसी हुई!
ना सही से खड़े होने की जगह, ना ही सुरक्षित रहने की कोई गारंटी… आखिर ये हाल कब तक चलेगा?

क्या हमारी यात्रा अब सिर्फ “किसी तरह पहुंच जाने” तक ही सीमित रह गई है?
महिलाओं की सुरक्षा का जिम्मा कौन लेगा? 🤔

👉 जब हालात ऐसे हो जाएं कि जिंदगी दांव पर लग जाए, तो सिस्टम पर सवाल उठना लाज़मी है।
👉 क्या रेलवे को अब भीड़ कंट्रोल और सुरक्षा के लिए सख्त कदम नहीं उठाने चाहिए?

अपनी राय जरूर दें क्या ये लापरवाही है या मजबूरी? 👇