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ये हैं कर्नल पृथीपाल सिंह गिल ये भारत के इकलौते ऐसे सैनिक थे, जिन्होंने थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों में सेवा दी।भारतीय सशस्त्र सेनाओं में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत कोई व्यक्ति वायुसेना में सेवा देने के बाद नौसेना में चला जाए और वहां से थल सेना। पूरे भारत में इसका सिर्फ एक ही उदाहरण मौजूद है और वह हैं चंडीगढ़ के रहने वाले (रिटा.) कर्नल पृथीपाल सिंह गिल। सेक्टर-35 में रहने वाले कर्नल गिल देश के इकलौते ऐसे सैन्य अधिकारी हैं, जिन्होंने तीनों सेनाओं और पैरामिलिट्री फोर्स में अपना शौर्य दिखाया है।
1942 में रॉयल इंडियन एयरफोर्स में बतौर कैडेट जॉइन करते समय था। पिता को डर न होता तो शायद एयरफोर्स में ही रहते। मगर किस्‍मत को तो उनके नाम कुछ खास करना था। एयरफोर्स से नेवी में गए और फिर वहां से आर्मी में। जब रिटायर हुए तो देश के इकलौते ऐसे अधिकारी बन चुके थे जिसने सेना के तीनों अंगों- थल सेना, नौसेना और वायुसेना में अपनी सेवाएं दी हों। 1965 का भारत-पाक युद्ध हो या जम्‍मू-कश्‍मीर और पंजाब के बॉर्डर, कर्नल पृथीपाल ने सब देखा है। पूर्वोत्‍तर के पहाड़ी जंगलों में भी उनके कई साल गुजरे हैं।
कराची में फ्लाइट कैडेट थे, डर से पिता ने नेवी ज्वॉइन कराया
(रिटा.) कर्नल पृथीपाल सिंह गिल ने अपने सैन्य कैरियर की शुरुआत साल 1942 में रॉयल इंडियन एयरफोर्स में बतौर पायलट ऑफिसर के तौर पर शुरू किया। वे कराची में तैनात थे। कुछ समय बीतने के बाद उनके पिता को डर लगा कि कहीं पृथीपाल एयरक्रैश का शिकार न हो जाएं। उस समय उनके पिता की पहचान सेना के एक जनरल से थी। उनसे बात कर पृथीपाल को नौसेना में ज्वाइन करवा दिया। यहां भी उनका कैरियर शानदार रहा।

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