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क्या आप भी रात को सिर्फ '5 मिनट' रील देखने के बहाने फोन उठाते हैं और कब २ बज जाते हैं, पता ही नहीं चलता? अगर हाँ, तो समझ लीजिए कि आप सिर्फ वक्त नहीं काट रहे हैं, बल्कि अपने ही हाथों अपनी गहरी और सुकून भरी नींद का बेरहमी से कत्ल कर रहे हैं! विज्ञान कहता है कि जैसे ही अंधेरा होता है, हमारा दिमाग स्वाभाविक रूप से मेलाटोनिन (Melatonin) नामक एक जादुई 'स्लीप हार्मोन' रिलीज करता है, जो शरीर को सोने का सिग्नल देता है। लेकिन जब आप अंधेरे कमरे में फोन की चमचमाती स्क्रीन को घूरते हैं, तो उससे निकलने वाली हाई-एनर्जी ब्लू लाइट (Blue Light) सीधे आपकी आंखों के रास्ते दिमाग को धोखा देती है कि 'अभी भी बाहर दिन का उजाला है'। नतीजा? दिमाग मेलाटोनिन के सिक्रीशन (उत्पादन) को पूरी तरह रोक देता है। यह एक तरह का 'डिजिटल जेट लैग' है, जिससे आपके शरीर की नेचुरल बायोलॉजिकल क्लॉक (सर्कैडियन रिदम) पूरी तरह तहस-नहस हो जाती है। जब आप जबरदस्ती अपने शरीर को जगाए रखते हैं, तो अगली सुबह उस थकान, सुस्ती और सिरदर्द को रिकवर करने के लिए आपकी बॉडी और इंटरनल ऑर्गन्स को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसे 'नींद का साइलेंट किलर' कहा जाता है, जो धीरे-धीरे आपकी डीप स्लीप (गहरी नींद) के फेज को छोटा कर देता है। इसलिए, अगर आप अगली सुबह बिना थकान और पूरी एनर्जी के साथ जागना चाहते हैं, तो सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले अपने इस 'स्मार्ट दुश्मन' को खुद से दूर रखने की आदत आज से ही डाल लीजिए। #night #sleep #smartphone #light

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