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18 नवंबर 1962... लद्दाख की बर्फीली वादियों में स्थित रेजांग ला की ऊँचाइयों पर भारत के 120 वीर जवानों ने ऐसा इतिहास रचा, जिसे दुनिया आज भी सलाम करती है।
चारों ओर बर्फ, हड्डियां जमा देने वाली ठंड, ऑक्सीजन की भारी कमी और सामने लगभग 3000 चीनी सैनिक...
लेकिन 13 कुमाऊँ रेजिमेंट के इन रणबांकुरों के हौसले हिमालय से भी ऊँचे थे। इनके नेतृत्व में थे राजस्थान के जोधपुर के वीर भाटी राजपूत, परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह भाटी।
जब दुश्मन ने भारी संख्या में हमला किया, तब भी मेजर शैतान सिंह एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट तक जाकर जवानों का मनोबल बढ़ाते रहे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अंतिम सांस तक लड़ाई जारी रखी।
इस युद्ध में 120 में से 114 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन उन्होंने दुश्मन को भारी क्षति पहुंचाकर शौर्य और बलिदान की ऐसी गाथा लिखी जो सदियों तक अमर रहेगी।
भारत माता के इस वीर सपूत को उनकी अद्वितीय बहादुरी के लिए देश का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र प्रदान किया गया।
🙏 कोटि-कोटि नमन उस अमर वीर को, जिसने अपने प्राणों की आहुति देकर राष्ट्र का मस्तक ऊँचा किया।

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